Tuesday, 5 April, 2011

नवरात्र प्रारम्भ- प्रथम दिन माँ काली


नवरात्र में दस महा विद्या की साधना सबसे श्रेष्ठ मानी गई है। उच्च्य कोटि के साधक चैत्र नवरात्र में ही दस महाविद्या की साधना को सिद्ध किया करते हैं. उन सभी भक्तो और साधुओं के लिए दस महाविद्या की साधना कैसे करें मैं यहाँ संचिप्त में वर्णन कर रहा हूँ।

प्रथम दिन की महा देवी काली स्वरुप हैं
इनकी साधना साधक को उत्तर की ओर मुख करके करनी चाहिए
इनका महा मंत्र - क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा:
इस मंत्र का कम से कम ११०० बार जाप करना चाहिए तथा विशेष सिद्धि के लिए विशेष जाप की आवशकता होती है।

दस महाविद्या की साधना करनेवाले सभी साधको को ९ दिन फलहार में रहना चाहिए तथा किसी एक रंग के वस्त्र को नौ दिन धारण करना चाहिए।
रंगों में तीन रंग प्रमुख हैं- काला (उत्तम ), लाल (मध्य ), सफ़ेद (निम्न)। इस प्रकार का साधना विशेष साधको के लिए है। परन्तु सामान्य भक्तजन न्यूनतम सुबह शाम इस म़हामंत्र का जाप 108 बार करें तो उनके घरमें सुख शान्ति बनी रहती है और आकाल मृत्यु नही होती है.

मैं इस ब्लॉग में नवों दिन दस महा विद्या की देवियों की पूजा का इसी प्रकार वर्णन करूँगा। विस्तृत जानकारी के लिए संजय्तंत्रम पुस्तक को पढे। यह पुस्तक आप मेरी साईट Books To Download से खरीद सकते हैं.

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